Thursday, December 10, 2020

Uttarakhand ki lok snskriti

उत्तराखंड राज्य लोक संस्कृति

पहाड़ी चित्रकला के विकास की तीन मुख्य शाखाएं हैं =  बसोहली ,  कागड़ा , गढ़वाली शैली 

गढ़वाली शैली के चित्रों की खोज  बैरिस्टर मुकुंदी  लाल ने की थी


 मोरप्रिया चित्र मोलाराम का प्रारंभिक अवस्था का चित्र है


 गढ़वाली शैली की चित्रकला के सूत्र पात  हीरालाल थे जो मोलाराम के वंशज थे


 मोलाराम तोमर गढ़वाली शैली के सर्वश्रेष्ठ चित्रकार थे


मोलाराम के बाद गढ़वाली शैली के चित्रकार उनके वंशज ज्वालाराम हुआ शिवराम हुए 


दंपत्ति चित्र में मोलाराम ने  प्रदुम नशा व उसकी रानी का चित्र बनाया था


चंद्रमुखी का चित्र मोलाराम द्वारा बनाया गया है 


13 चित्रों की रुकमणिहरण माला का चित्रांकन चित्रकार  चैतू ने किया था


  चैतू  ने कृष्ण लीलाओं के चित्र पर ख्याति प्राप्त की थी


   चैतू अपने बनाए चित्रों के पृष्ठ भाग पर हस्ताक्षर करता था


 मणिराम बैरागी भी चैतू के समय का चित्रकार था


 आंख मिचोली का रंगीन चित्र का चित्रांकन माणकु  ने किया


माणकु  ने जयदेव रचित गीत गोविंद का  चित्रण 1730 में किया


 चैतू  व माणकु   चित्रकार सुदर्शन शाह के दरबारी चित्रकार थे


माणकु  देवलगढ़ समीप रामपुर  निवासी था


 मोरप्रिया चित्र में पक्षियों का अंकन  किया गया


uttarakhand ki lok snskriti
उत्तराखंड लोककला संस्कृति 



 चंद्रमुखी चित्र पर मोलाराम ने  कविता भी  लिखी है 


 हिंडोला व मस्तानी चित्र का चित्रण मोलाराम ने  किया


मोलाराम 8 संग्रहालय श्रीनगर में है


 नरेंद्र शाह संग्रहालय नरेंद्र नगर में है


 गिरिजा किशोर जोशी संग्रहालय अल्मोड़ा में है


 मुकुंदी लाल जी का संग्रहालय कोटद्वार में है


 राव वीरेंद्र शाह संग्रहालय देहरादून में है 


 गढ़वाली शैली पर मुकुंदी लाल द्वारा लिखित पुस्तक है 


राज्य  लोक चित्र 


ऐपण लोकचित्र का तात्पर्य सजावट करने से है 


ऐपण  लोक चित्र  मांगलिक व धार्मिक कार्यों में घर के आगमन  में बनाए  गये  सुंदर चित्र होते हैं 


 ज्युति मात्रक चित्र में विभिन्न रंगों से देवी-देवताओं का चित्रण होता है


 प्रकीर्ण चित्र में कागज व  दरवाजों पर हाथ के छाप  लगाए जाते हैं 


थापा चित्र में चावल पीसकर रंगों का प्रयोग मांगलिक अवसर पर करते हैं


 नत  या  टुपुक  चित्र रसोई घरों की दीवारों पर चित्र बनाए जाते हैं



राज्य लोक कला 


राज्य की पहली फिल्म जग्वाल है , जो 1983 मे प्रदर्सित  हुयी 


जग्वाल फिल्म  के नायक परेश्वर गौड़ व नायिका कुसुम बीस्ट थी 


सबसे सफल गढ़वाली फिल्म घरजवे थी , जो 1985 में बनी 


कुमाऊंनी बोली की पहली फिल्म मेघा आ थी 


भूकम्प पर बनी राज्य की प्रसिद्ध फिल्म चक्रचाल थी 


जौनसार क्षेत्र की एकमात्र डाक्यूमेंट्री चलदा जातरा थी 


उत्तराखंड फिल्म को हॉलीवुड  के  नाम से जाना जाता है 


राज्य की पहली आडियो कम्पनी के सीरीज है 


कुमाऊ में होने  वाली रामायण अल्मोड़ा बोली की है 


कौथिक शब्द का अर्थ मेला होता है 


कौतुक का अर्थ खेल या तमाशा होता है 


काफल का वैज्ञानिक नाम है = मइरिका मैगी है 


चीड़ का वैज्ञानिक नाम है   = पीनस रॉक्सबर्गी 


बाज का वैज्ञानिक नाम है = इनकेना 


रीगाल  का वैज्ञानिक नाम है = कीमोनोबमोसा  फ़ैलकटा 


भांग का वैज्ञानिक नाम है = कैनबिस सैटिवा 


2007 में सौर ऊर्जा में अग्रणी रहने के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार मिला


2004 में बेस्ट टूरिज्म बोर्ड के लिए राज्य को एक्सप्रेस गैलीलियो पुरस्कार मिला 




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