Friday, December 11, 2020

Uttarakhand ke aabhushan

 उत्तराखंड के परंपरागत आभूषण , लोकनृत्य ,संगीत वाद्ययंत्र

 शीशफूल आभूषण =  माथे पर हुक के माध्यम से लगाया जाता है

 मांग टीका  आभूषण = महिलाओं के सुहाग का प्रतीक है माथे पर लगाया जाता है

 मूर्खली आभूषण =  कानों में पहनी जाती है

 तुग्यल आभूषण =   कुमाऊं क्षेत्र में कान में लगाने वाले आभूषण हैं

 गोरख  आभूषण =  पुरुषों द्वारा कानों में पहने जाने वाला आभूषण है

 नथ  या नथूली आभूषण = गढ़वाल व कुमाऊं क्षेत्र में नाक में पहने  जाने वाला आभूषण है जो सुहाग का प्रतीक माना जाता है

नथुली को बेसर भी कहा जाता है

 बुलाक  आभूषण = नाक में पहने जाने वाला आभूषण का आकार u  की तरह होता है

फूली आभूषण = नाक में पहनी जाती है इसे कील भी कहा जाता है

 गुलबंद  आभूषण = गले में पहने जाने वाला आभूषण है वर्तमान में लॉकेट की तरह है

 चरयो  आभूषण = गले में पहना जाता है

हसुली  आभूषण = गले में पहनी जाती है

 हमेल आभूषण = गले में पहने जाने वाली सिक्कों की माला है

 धागुली आभूषण  = हाथ में पहनी जाती है मैदानी क्षेत्रों में इसे खड़वे  कहा जाता है


uttarakhand ke aabhushan
  uttarakhand ke aabhushan


थवाक  आभूषण = कलाई में पहना जाता है

 गोखले आभूषण = हाथ में पहने जाने वाला आभूषण है जिसे बाजूबंद भी कहा जाता है

 इमरती आभूषण = पैरों में पायल के साथ पहनी जाती है

झावर आभूषण = पैरों में पहने जाने वाला आभूषण है

पोटा आभूषण = पांव का आभूषण है

 मुनाड  आभूषण = तिब्बती लोग द्वारा कान में पहने जाने वाला आभूषण है

 झुपीय  आभूषण = तिब्बती लोग गले में पहनते हैं


  उत्तराखंड के लोकनृत्य

 लोक नृत्य लोक कलाओं में प्राचीनतम माने जाते हैं

 भगवान शिव को नृत्य का देवता कहा जाता है 

भगवान शिव का तांडव नृत्य रौद्र रूप में होता है

  पार्वती का लास्य नृत्य कोमल रूप में  अभिव्यक्त होता है

 थड़िया नृत्य गढ़वाल में बसंतपंचमी के समय विवाहित लड़कियां पहली बार माइके आने पर करती है

सरो  नृत्य गढ़वाल में किए जाने वाला  युद्ध गीत नृत्य है

 भुटिया लोगों का पौणा   नृत्य भी युद्ध नृत्य शैली का है

 कुमाऊं में छोलिया नृत्य युद्ध नृत्य की शैली का है

 हारूल नृत्य जौनसारीओं द्वारा रमतूला वाद्ययंत्र के साथ किया जाता है

 गुड़ियात जौनसार में किया जाता है

 मंडार  नृत्य टिहरी और उत्तरकाशी में किया जाता है

 लंगवीर  पुरुषों द्वारा  खंबे पर चढ़कर किया जाता है

 चौफला नृत्य गढ़वाल में किया जाने वाला श्रंगार भाव नृत्य है

 झूमेलो  नृत्य  नवविवाहित कन्याओं द्वारा किया जाता है

चाचरी नृत्य गढ़वाल क्षेत्रों में स्त्री व पुरुषों द्वारा किया जाता है

बैर नृत्य कुमाऊं क्षेत्र में  गाया जाने वाला  प्रतियोगिता गीत है

भगनोल  नृत्य कुमाऊं क्षेत्र में मेलों के अवसर पर नृत्य किया जाता है

बाजूबंद नृत्य रवाई क्षेत्र में किया जाने वाला स्त्री व पुरुषों के बीच संवाद नृत्य है

 गढ़वाल में बाजूबंद नृत्य को दुड़ा  कहते हैं


उत्तराखंड के संगीत वाद्य यंत्र

उत्तराखंड का राज्य वाद्य यंत्र ढोल है

 राज्य में लगभग 36 प्रकार के वाद्य यंत्र है

 मसकबीन वाद्य यंत्र मूल रूप से स्कॉटलैंड का है

 मोछंग लोहे से बना फुक  वाद्य यंत्र

सरगी व इक तारा तारा वाद्य यंत्र है

मंजीरा घुंगरू व चिमटा घन वाद्य यंत्र है


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