Wednesday, December 23, 2020

Uttarakhand Ka Nadi Tantra

उत्तराखंड यमुना नदी तंत्र

यमुना नदी उत्तरकाशी के बंदरपूंछ पर्वत के दक्षिणी पश्चिमी डाल पर स्थित यमुनोत्री ग्लेशियर के यमुनोत्री कांटा नामक स्थान से निकलती है उत्तरकाशी व देहरादून में बहते हुए यह  राज्य से बाहर निकल जाती है 

 यमुना की सहायक नदियां - ऋषि गंगा , हनुमान गंगा , कृष्णागाड,  बनागाड,  कमलगाड , खुतनुगाड ,  बर्नीगाड , भद्रीगाड़ , मुगरागाड़ , टोंस,  आसान  आदि  सहायक नदियां है

 यमुना नदी की सबसे प्रमुख सहायक नदी   टोंस नदी है जो कि यमुना में  ढाई गुना अधिक जल लाती है यह उत्तरकाशी स्थित बंदरपुर पर्वत के  उत्तरी ढाल के  स्वर्गारोहिणी ग्लेशियर से  निकलने वाली  सुपिर नदी व हिमाचल प्रदेश के  डोडरा कवार  क्षेत्र से आने वाली रूपीन  नदी में मिलने से बनी है 


यमुनोत्री से गाजीपुर तक अथवा उत्तराखंड में  यमुना की लंबाई 136 किलोमीटर है जबकि यमुनोत्री से इलाहाबाद तक कुल लंबाई 1384 किलोमीटर है

 

 

Uttarakhand Ka Nadi Tantra
यमुना नदी तंत्र



 


उत्तराखंड की प्रमुख नदियो की राज्य में लम्बाई


 नदी  

 उदगम 

 कहा तक 

  लम्बाई km

भागीरथी     गोमुख देवप्रयाग  205km  
भिलंगना    खतलिंग हिमनद पुरानी टिहरी  110 km
अलकनन्दा   सतोपंत हिमनद  देवप्रयाग  195 km
 विष्णु गंगा या धौलीगंगा देवन हिमानी  विष्णु  प्रयाग  94 km
पिंडर   पिंडारी हिमनद करणप्रयाग 105 km
मंदाकिनी केदारनाथ      रुद्रप्रयाग 72 km
नंदाकिनी नंदा घोटी नंदप्रयाग 56 km
गंगा देवप्रयाग हरिद्वार सीमा 96 km
पूर्वी नयार दुधाटोली सतपुली 109 km
पश्चिमी नयार दुधाटोली सतपुली  78 km
पश्चिमी रामगंगा दुधाटोली कालागढ़ 155 km
कोसी कौसानी सुल्तानपुर 168km
गोला पहाड़ पानी किच्छा 102km
काली नदी लिपुलेख टनकपुर 252km
सरयू सर मूल पंचेश्वर 146km
पूर्वी रामगंगा पेंटिंग रामेश्वर 108 km
गोरी गंगा मिलन जौलजीबी 104km
टोंस रुपिन - सुपिन ग्लेशियर डाकपत्थ देहरादून140km
यमुना यमुनोत्री धामपुर देहरादून 136km


👉 यहाँ क्लिक करे  उत्तराखंड राज्य की प्रमुख जलविद्युत परियोजना / ऊर्जा संसाधन  जानने के लिए 
 
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गंगा जल तंत्र

 

राज्य में गंगा नदी गंगा के नाम से  देवप्रयाग के बाद जाना जाता है जबकि गंगोत्री से देवप्रयाग तक इसे भागीरथी के नाम से जाना जाता है

 देवप्रयाग में भागीरथी और अलकनंदा मिलकर जब गंगा के नाम से आगे बढ़ती है तो पौड़ी के ब्याजघाट के पास फूलचट्टी नामक स्थान पर बाएं ओर से नयार ( नादगंगा ) नदी मिलती है आगे बढ़ने पर देहरादून के ऋषिकेश में दाई ओर से चंद्रभागा नदी और फिर आगे बढ़ने पर दाई  ओर से रायवाला  के पास सॉन्ग नदी मिलती है

गंगा नदी भारत के 5 राज्यों से होकर गुजरती है उत्तराखंड ,उत्तर प्रदेश , बिहार , झारखंड , पश्चिम बंगाल 


गंगा की मुख्य सहायक नदियां

 रूद्रगंगा, मिलुनगंगा, केदारगंगा 



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 दाबका नदी

कोसी से ठीक पूर्व में प्रवाहित यह नदी नैनीताल के गर्मपानी नामक स्थान के पश्चिम से निकलकर नैनीताल तथा उधम सिंह नगर में  बहते हुए बाजपुर उधमसिंह नगर के पास राज्य से बाहर हो जाती है

 

 बराकर नदी


 दाबका के पूर्व और उसके समांतर बहने वाली यह नदी भी नैनीताल से निकलती है नैनीताल तथा उधमसिंह नगर में बहने के बाद खानपुर (उधमसिंह नगर ) के पास राज्य से बाहर हो जाती है

 

 सरयु नदी 


काली नदी को सबसे अधिक जलराशि देने वाली कुमाऊं की पवित्र नदी सरयू बागेश्वर के दक्षिण पश्चिम में स्थित सरमूल ( झुंडी )नामक स्थान से निकलती है बैजनाथ तीर्थ व बागेश्वर नगर इसके तट पर है पिथौरागढ़ -अल्मोड़ा तथा पिथौरागढ़ , चंपावत का बॉर्डर बनाते हुए  146  किलोमीटर प्रवाहित होने के बाद पंचेश्वर से 40 किलोमीटर नीचे यह काली नदी में दाई ओर से मिल जाती है यह पश्चिम से पूर्व को बहती है 

सरयु की प्रथम सहायक नदी गोमती  है जो बागेश्वर में सरयू में मिल जाती है


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 लधिया  नदी  

 उत्तराखंड की यह अंतिम नदी है जो काली नदी में मिलती ( दाएं ओर से ) है काली नदी में हो चुका ( चंपावत ) के पास मिलती है यह पश्चिम से पूर्व की ओर बहती है लधिया  पिथौरागढ़ , अल्मोड़ा , नैनीताल के मिलन बिंदु गजार से निकलती है 



काली शारदा नदी की सहायक नदियां 


पूर्वी धौलीगंगा , गौरी गंगा , लोहावट सरयू ,  लधिया  



अलकनंदा नदी की सहायक नदी


 सरस्वती , पश्चिमी धौलीगंगा , विरथी ,  नबालिका,  लक्ष्मण गंगा ,  नंदाकिनी,  पिडर ,  मंदाकिनी आदि नदियां





Saturday, December 19, 2020

Uttarakhand Ki Pramukh Janjatiya

 उत्तराखंड की प्रमुख जनजातियाँ


 उत्तराखंड में 5 जनजातियाँ  जिन्हें 1967 में अनुसूचित जनजाति (ST) घोषित किया गया


 राज्य की 65 जातियो को 1976 में अनुसूचित जाति (SC) घोषित किया गया


 राज्य की सर्वाधिक जनसंख्या वाली जनजाति है =  थारू जनजाति


  राज्य की सबसे कम जनसंख्या वाली जनजाति है =  राजी जनजाति


 अनुसूचित जनजातियों की सबसे अधिक आबादी वाला जिला ऊधम सिंह नगर


 अनुसूचित जनजातियों की आबादी सबसे कम रुद्रप्रयाग जिले में है

 

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   जौनसारी जनजाति


 राज्यों का दूसरा सबसे बड़ा जनजातीय समुदाय तथा गढ़वाल का सबसे बड़ा जनजातीय समुदाय है


 जौनसारी लोग राज्यों के पश्चिमी भाग जौनसार -भाबर क्षेत्रो में वास करते हैं


देहरादून जिले के चकराता, कालसी त्यूनी  और लाखामंडल क्षेत्र में  रहते  हैं

 

जौनसारी लोग पांडवों को अपना वंशज मानते हैं

 

ख़सास  वर्ग में ब्राह्मणों और राजपूत लोग आते हैं


जौनसारी लोगों का समाज पितृसत्तात्मक होता है


 इन लोगों में पहले बहुपति विवाह का प्रचलन था


 जौनसारी लोग ऊन से बने पेजामे को झगोली कहते हैं


 इन  लोगों का मुख्य देवता महासू देवता है


 जौनसार के लोग  विश्व त्यौहार या वैशाखी मनाते हैं


 वीर केसरी मेला 3 मई को चोलीथात  में शहीद केसरी चंद के बलिदान दिवस के रुप में मनाया जाता है


 जौनसार का प्रथम कवि  है  = पंडित शिवराम


मनोज सागर  एक जौनसारी गायक है


  थारू जनजाति


 थारु लोगों को किरात वंश का माना जाता है


 थारु लोग अपने आप को महाराणा प्रताप का वंशज मानते हैं


 थारु लोग गोत्र को कुरी  कहते हैं 


 थारू जनजाति के लोग  विवाह की सगाई रस्म को अपना -पराया कहते हैं


 विवाह की तिथि तय करने वाली रस्म को बात कट्टी कहते हैं


 विधवा विवाह में लटभरवा भोज होता है


 थारू जनजाति के लोगों का प्रमुख त्योहार बजहर  है जो  वैशाख में मनाया जाता है 


 थारू जनजाति के लोग लोग होली को 8 दिन तक बनाते हैं


 थारु लोग होली के अवसर पर खिचड़ी नृत्य करते हैं


 भोटिया जनजाति


 भोटिया जनजाति कीरात वंशीय अर्धघुमंतु जनजाति है


भोटिया जनजाति की लगभग 10 उपजातिया  राज्यों में निवास करती है 


 भोटिया जनजाति के ग्रीष्मकालीन आवाज को मेती  कहते हैं


 भोटिया जनजाति के लोग शराब को छंग  कहते हैं


 भोटिया जनजाति में दूसरी विवाह प्रथा को तत्सत नाम से जाना जाता  हैं


 विवाह अवसर पर भोटिया लोग पौडा  नृत्य करते हैं 


 अपने सगे संबंधियों को भोटिया लोग स्वरा कहते हैं


 भोटिया जनजाति के लोग  प्रत्येक 12 वर्ष में के बाद कंडारी उत्सव  मनाते है 


 भोटिया जनजाति का वाद्य यंत्र हुक्का है



 बुक्सा जनजाति


 बुक्सा लोग  उधम सिंह नगर के बाजपुर काशीपुर और नैनीताल के रामनगर  जिले में वास करते हैं 


बोक्सा लोगों  5 उपजातियो में  विभक्त  है

बोक्सा लोग गांव को माझरा  कहते हैं 


 

राजी  जनजाति


 राजी  जनजाति के लोग पिथौरागढ़ के  धारचूला , डीडीहाट विकासखण्डो के 7 गाँवो में निवास करती  हैं 


 राजी जनजाति को वनरोत / जंगल का राजा कहा जाता है


 राजी  जनजाति के लोग काष्ठ कला में निपुण होते हैं


 राजी  जनजाति में पहले पलायन विवाह प्रचलित था


 राजी जनजाति के लोग रिंग डांस करते हैं


 राजी  जनजाति के प्रमुख देवता बागनाथ देवता है 

   


Tuesday, December 15, 2020

Uttrakhand Rajya ki Pramukh Jal Vidyut Pariyojna

उत्तराखंड राज्य की  जलविद्युत परियोजना / ऊर्जा संसाधन 

किसी भी देश या प्रदेश या फिर किसी क्षेत्र के जो भौतिक प्रगति है उसका आकलन किया जाता है वहां के औद्योगिक विकास पर , यहां का इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट होता है उसके विकास पर और उद्योगों को चलना चलने के लिए जरूरत पड़ती है ऊर्जा की( एनर्जी की ) और वर्तमान में जो यह ऊर्जा है उसके नवीकृत जो भी साधन है 

उनका उपयोग किया जा रहा है नवीकृत का अर्थ  होता है जो कि कभी भी समाप्त नहीं होते हैं  

भारत देश की  सर्वप्रथम जल विद्युत परियोजनाओं को शुरू किया गया है इसके अंतर्गत जो सबसे पहला जो प्रोजेक्ट बनाया गया 1883 में गुजरात के सूरत में  राप्ती नदी  पर एक लघु जल विद्युत परियोजना को बनाया गया

 केंद्र सरकार के आकलन के अनुसार यदि हम बाकि देशो की  तरह उनको  विकसित करें 

तो लगभग यहां उत्तराखंड में ही  लगभग 40000 mw तक कि विद्युत का उत्पादन किया जा सकता है

और  यदि  उत्तराखंड बात करे तो  यह पर  1910 इंडियन इलेक्ट्रिसिटी एक्ट के  लागु होने के बाद   1914 में मसूरी के नजदीक भट्टा फॉल पर गोली नामक स्थान पर 5 किलो वाट की दो विद्युत इकाइयां थी उनकी स्थापना की गई और उसके बाद राज्य में विद्युत उत्पादन का कार्य प्रारंभ हुआ

https://youtu.be/1iIqDnyjaFE

 

उत्तराखंड का अधिकतम  भाग परिवर्तित होने के कारण यहां पर जल विद्युत उत्पादन की सम्भवनाएँ बहुत अधिक हो जाती है क्यूकि यहा पर बहुतसारी नदिया है
और उत्तराखंड को विशेष राज्य का दर्जा होने के कारण जब कोई परियोजना होती है उसके लिए 90% केंद्र के लिए होता है और 10% राज्य को लौटाना पड़ता है इसलिए भी यहां पर जो जल विद्युत परियोजनाएं हैं उनकी विकास में मदद मिलती है और इसके लिए विभिन्न संस्थाओ में ,


जैसे कि

1    

 उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड                                 

उत्तराखंड पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड ( पिटकुल )

उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL )

उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग

अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी

इस प्रकार के एजेंसिओ की मदद से राज्य के अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग जिलों में छोटी और बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं को संचालित किया गया है तथा कई स्थानों पर यहां पर जल विद्युत परियोजनाएं निर्माणाधीन है और महत्वपूर्ण जल विद्युत परियोजना यहां पर बनाए जा रहे हैं और उनका उपयोग देश और विदेश में किया जा रहा है तो दोस्तों इस Blog में राज्य की इन सभी परियोजनाओं के बार में अध्ययन करेंगे


देहरादून जिले की जल विद्युत परियोजनाएं 

No. परियोजनाएं   मेघावाट/क्षमता      नदी  
1. ढलीपुर परियोजना 51   टोंस नदी
2. लखवाड़ परियोजना 300 यमुना नदी
3. छिबरो परियोजना  240 टोंस नदी
4. खोदरी परियोजना 120-125 टोंस नदी
5. हथियारी परियोजना 122 यमुना नदी
6. ढकरानी परियोजना 33.75/34  यमुना नदी
7. कुल्हाल परियोजना 30/32 यमुना नदी
8. ग्लोगी मसूरी परियोजना
2mw भट्टा फॉल
9. किशाऊ बांध परियोजना 600mw टोंस नदी




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Friday, December 11, 2020

Uttarakhand ke aabhushan

 उत्तराखंड के परंपरागत आभूषण , लोकनृत्य ,संगीत वाद्ययंत्र

 शीशफूल आभूषण =  माथे पर हुक के माध्यम से लगाया जाता है

 मांग टीका  आभूषण = महिलाओं के सुहाग का प्रतीक है माथे पर लगाया जाता है

 मूर्खली आभूषण =  कानों में पहनी जाती है

 तुग्यल आभूषण =   कुमाऊं क्षेत्र में कान में लगाने वाले आभूषण हैं

 गोरख  आभूषण =  पुरुषों द्वारा कानों में पहने जाने वाला आभूषण है

 नथ  या नथूली आभूषण = गढ़वाल व कुमाऊं क्षेत्र में नाक में पहने  जाने वाला आभूषण है जो सुहाग का प्रतीक माना जाता है

नथुली को बेसर भी कहा जाता है

 बुलाक  आभूषण = नाक में पहने जाने वाला आभूषण का आकार u  की तरह होता है

फूली आभूषण = नाक में पहनी जाती है इसे कील भी कहा जाता है

 गुलबंद  आभूषण = गले में पहने जाने वाला आभूषण है वर्तमान में लॉकेट की तरह है

 चरयो  आभूषण = गले में पहना जाता है

हसुली  आभूषण = गले में पहनी जाती है

 हमेल आभूषण = गले में पहने जाने वाली सिक्कों की माला है

 धागुली आभूषण  = हाथ में पहनी जाती है मैदानी क्षेत्रों में इसे खड़वे  कहा जाता है


uttarakhand ke aabhushan
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थवाक  आभूषण = कलाई में पहना जाता है

 गोखले आभूषण = हाथ में पहने जाने वाला आभूषण है जिसे बाजूबंद भी कहा जाता है

 इमरती आभूषण = पैरों में पायल के साथ पहनी जाती है

झावर आभूषण = पैरों में पहने जाने वाला आभूषण है

पोटा आभूषण = पांव का आभूषण है

 मुनाड  आभूषण = तिब्बती लोग द्वारा कान में पहने जाने वाला आभूषण है

 झुपीय  आभूषण = तिब्बती लोग गले में पहनते हैं


  उत्तराखंड के लोकनृत्य

 लोक नृत्य लोक कलाओं में प्राचीनतम माने जाते हैं

 भगवान शिव को नृत्य का देवता कहा जाता है 

भगवान शिव का तांडव नृत्य रौद्र रूप में होता है

  पार्वती का लास्य नृत्य कोमल रूप में  अभिव्यक्त होता है

 थड़िया नृत्य गढ़वाल में बसंतपंचमी के समय विवाहित लड़कियां पहली बार माइके आने पर करती है

सरो  नृत्य गढ़वाल में किए जाने वाला  युद्ध गीत नृत्य है

 भुटिया लोगों का पौणा   नृत्य भी युद्ध नृत्य शैली का है

 कुमाऊं में छोलिया नृत्य युद्ध नृत्य की शैली का है

 हारूल नृत्य जौनसारीओं द्वारा रमतूला वाद्ययंत्र के साथ किया जाता है

 गुड़ियात जौनसार में किया जाता है

 मंडार  नृत्य टिहरी और उत्तरकाशी में किया जाता है

 लंगवीर  पुरुषों द्वारा  खंबे पर चढ़कर किया जाता है

 चौफला नृत्य गढ़वाल में किया जाने वाला श्रंगार भाव नृत्य है

 झूमेलो  नृत्य  नवविवाहित कन्याओं द्वारा किया जाता है

चाचरी नृत्य गढ़वाल क्षेत्रों में स्त्री व पुरुषों द्वारा किया जाता है

बैर नृत्य कुमाऊं क्षेत्र में  गाया जाने वाला  प्रतियोगिता गीत है

भगनोल  नृत्य कुमाऊं क्षेत्र में मेलों के अवसर पर नृत्य किया जाता है

बाजूबंद नृत्य रवाई क्षेत्र में किया जाने वाला स्त्री व पुरुषों के बीच संवाद नृत्य है

 गढ़वाल में बाजूबंद नृत्य को दुड़ा  कहते हैं


उत्तराखंड के संगीत वाद्य यंत्र

उत्तराखंड का राज्य वाद्य यंत्र ढोल है

 राज्य में लगभग 36 प्रकार के वाद्य यंत्र है

 मसकबीन वाद्य यंत्र मूल रूप से स्कॉटलैंड का है

 मोछंग लोहे से बना फुक  वाद्य यंत्र

सरगी व इक तारा तारा वाद्य यंत्र है

मंजीरा घुंगरू व चिमटा घन वाद्य यंत्र है


Thursday, December 10, 2020

Uttarakhand ki lok snskriti

उत्तराखंड राज्य लोक संस्कृति

पहाड़ी चित्रकला के विकास की तीन मुख्य शाखाएं हैं =  बसोहली ,  कागड़ा , गढ़वाली शैली 

गढ़वाली शैली के चित्रों की खोज  बैरिस्टर मुकुंदी  लाल ने की थी


 मोरप्रिया चित्र मोलाराम का प्रारंभिक अवस्था का चित्र है


 गढ़वाली शैली की चित्रकला के सूत्र पात  हीरालाल थे जो मोलाराम के वंशज थे


 मोलाराम तोमर गढ़वाली शैली के सर्वश्रेष्ठ चित्रकार थे


मोलाराम के बाद गढ़वाली शैली के चित्रकार उनके वंशज ज्वालाराम हुआ शिवराम हुए 


दंपत्ति चित्र में मोलाराम ने  प्रदुम नशा व उसकी रानी का चित्र बनाया था


चंद्रमुखी का चित्र मोलाराम द्वारा बनाया गया है 


13 चित्रों की रुकमणिहरण माला का चित्रांकन चित्रकार  चैतू ने किया था


  चैतू  ने कृष्ण लीलाओं के चित्र पर ख्याति प्राप्त की थी


   चैतू अपने बनाए चित्रों के पृष्ठ भाग पर हस्ताक्षर करता था


 मणिराम बैरागी भी चैतू के समय का चित्रकार था


 आंख मिचोली का रंगीन चित्र का चित्रांकन माणकु  ने किया


माणकु  ने जयदेव रचित गीत गोविंद का  चित्रण 1730 में किया


 चैतू  व माणकु   चित्रकार सुदर्शन शाह के दरबारी चित्रकार थे


माणकु  देवलगढ़ समीप रामपुर  निवासी था


 मोरप्रिया चित्र में पक्षियों का अंकन  किया गया


uttarakhand ki lok snskriti
उत्तराखंड लोककला संस्कृति 



 चंद्रमुखी चित्र पर मोलाराम ने  कविता भी  लिखी है 


 हिंडोला व मस्तानी चित्र का चित्रण मोलाराम ने  किया


मोलाराम 8 संग्रहालय श्रीनगर में है


 नरेंद्र शाह संग्रहालय नरेंद्र नगर में है


 गिरिजा किशोर जोशी संग्रहालय अल्मोड़ा में है


 मुकुंदी लाल जी का संग्रहालय कोटद्वार में है


 राव वीरेंद्र शाह संग्रहालय देहरादून में है 


 गढ़वाली शैली पर मुकुंदी लाल द्वारा लिखित पुस्तक है 


राज्य  लोक चित्र 


ऐपण लोकचित्र का तात्पर्य सजावट करने से है 


ऐपण  लोक चित्र  मांगलिक व धार्मिक कार्यों में घर के आगमन  में बनाए  गये  सुंदर चित्र होते हैं 


 ज्युति मात्रक चित्र में विभिन्न रंगों से देवी-देवताओं का चित्रण होता है


 प्रकीर्ण चित्र में कागज व  दरवाजों पर हाथ के छाप  लगाए जाते हैं 


थापा चित्र में चावल पीसकर रंगों का प्रयोग मांगलिक अवसर पर करते हैं


 नत  या  टुपुक  चित्र रसोई घरों की दीवारों पर चित्र बनाए जाते हैं



राज्य लोक कला 


राज्य की पहली फिल्म जग्वाल है , जो 1983 मे प्रदर्सित  हुयी 


जग्वाल फिल्म  के नायक परेश्वर गौड़ व नायिका कुसुम बीस्ट थी 


सबसे सफल गढ़वाली फिल्म घरजवे थी , जो 1985 में बनी 


कुमाऊंनी बोली की पहली फिल्म मेघा आ थी 


भूकम्प पर बनी राज्य की प्रसिद्ध फिल्म चक्रचाल थी 


जौनसार क्षेत्र की एकमात्र डाक्यूमेंट्री चलदा जातरा थी 


उत्तराखंड फिल्म को हॉलीवुड  के  नाम से जाना जाता है 


राज्य की पहली आडियो कम्पनी के सीरीज है 


कुमाऊ में होने  वाली रामायण अल्मोड़ा बोली की है 


कौथिक शब्द का अर्थ मेला होता है 


कौतुक का अर्थ खेल या तमाशा होता है 


काफल का वैज्ञानिक नाम है = मइरिका मैगी है 


चीड़ का वैज्ञानिक नाम है   = पीनस रॉक्सबर्गी 


बाज का वैज्ञानिक नाम है = इनकेना 


रीगाल  का वैज्ञानिक नाम है = कीमोनोबमोसा  फ़ैलकटा 


भांग का वैज्ञानिक नाम है = कैनबिस सैटिवा 


2007 में सौर ऊर्जा में अग्रणी रहने के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार मिला


2004 में बेस्ट टूरिज्म बोर्ड के लिए राज्य को एक्सप्रेस गैलीलियो पुरस्कार मिला 




Current Affairs 8 February 2021

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